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अनंत सिंह और गुंजन सिंह की बढ़ीं मुश्किलें! वायरल हथियार वीडियो मामले में कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

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गोपालगंज की एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट में मोकामा विधायक अनंत सिंह और भोजपुरी गायक गुंजन सिंह से जुड़े वायरल हथियार वीडियो मामले में सुनवाई हुई। अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।

गोपालगंज/आलम की खबर:बिहार की राजनीति और भोजपुरी इंडस्ट्री से जुड़े चर्चित वायरल वीडियो मामले में बुधवार को गोपालगंज की एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। इस मामले में मोकामा के जदयू विधायक Anant Singh और भोजपुरी गायक Gunjan Singh की अग्रिम जमानत याचिका पर दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं। लंबी बहस सुनने के बाद अदालत ने फिलहाल अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब सभी की नजरें कोर्ट के अंतिम आदेश और फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।

पूरा मामला सोशल मीडिया पर वायरल हुए उस वीडियो से जुड़ा है, जिसमें कथित तौर पर हथियारों का प्रदर्शन और डांस कार्यक्रम दिखाई दिया था। वीडियो वायरल होने के बाद मामला तेजी से राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय बन गया। पुलिस ने मामले को गंभीर मानते हुए प्राथमिकी दर्ज की और जांच शुरू कर दी।

जानकारी के अनुसार, मीरगंज थाना क्षेत्र के सेमराव गांव में एक जनेऊ समारोह आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में विधायक अनंत सिंह अपने समर्थकों के साथ पहुंचे थे। कार्यक्रम में भोजपुरी गायक गुंजन सिंह भी प्रस्तुति देने आए थे। इसी दौरान हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम के कुछ वीडियो 2 और 3 मई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से वायरल हो गए।

वायरल वीडियो में कुछ लोग कथित तौर पर हथियार लहराते हुए दिखाई दिए। साथ ही डांस कार्यक्रम के दृश्य भी सामने आए, जिसे लेकर विरोधियों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए। वीडियो वायरल होते ही पुलिस प्रशासन सक्रिय हो गया और मामले की जांच शुरू कर दी गई।

बुधवार को इस मामले की सुनवाई जिला जज राजेंद्र पांडेय की एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट में हुई। बचाव पक्ष की ओर से पटना हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता नरेश दीक्षित समेत कई वकीलों ने अदालत में अपना पक्ष रखा। बचाव पक्ष ने कोर्ट से कहा कि वायरल वीडियो को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है और इसमें राजनीतिक साजिश की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

वकीलों ने दलील दी कि जिस वीडियो में विधायक अनंत सिंह दिखाई दे रहे हैं, उसमें किसी तरह का अश्लील डांस या गैरकानूनी गतिविधि नहीं हो रही थी। बचाव पक्ष का कहना था कि विधायक को जानबूझकर विवाद में घसीटने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने अदालत को बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल किए गए वीडियो के कई हिस्से संदिग्ध हैं और उसकी सत्यता की जांच जरूरी है।

भोजपुरी गायक गुंजन सिंह को लेकर भी बचाव पक्ष ने कहा कि वे केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रस्तुति देने पहुंचे थे। उनका किसी भी अवैध गतिविधि या हथियार प्रदर्शन से कोई संबंध नहीं है। वकीलों ने कोर्ट से कहा कि केवल कार्यक्रम में मौजूद रहने के आधार पर किसी को दोषी नहीं माना जा सकता।

दूसरी ओर अभियोजन पक्ष ने मामले को गंभीर बताते हुए कोर्ट में कहा कि वायरल वीडियो में कई लोग खुलेआम हथियार लहराते दिखाई दे रहे हैं। जिला लोक अभियोजक देव वंश गिरी उर्फ भानु गिरी ने अदालत को बताया कि वीडियो की सत्यता की पुष्टि के लिए उसे एफएसएल जांच के लिए भेजा गया है।

अभियोजन पक्ष का कहना है कि यह जांच बेहद महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि इससे स्पष्ट होगा कि वीडियो असली है या एडिटेड। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि वीडियो में दिख रहे हथियार लाइसेंसी थे या प्रतिबंधित श्रेणी में आते हैं। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि एफएसएल रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई और धाराओं को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट हो जाएगी।

पुलिस अधीक्षक विनय तिवारी ने भी मामले को संवेदनशील मानते हुए जांच तेज करने का निर्देश दिया है। पुलिस फिलहाल वीडियो में दिखाई देने वाले अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी हुई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कार्यक्रम में हथियार कैसे पहुंचे और उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया।

मामले में केवल अनंत सिंह और गुंजन सिंह ही नहीं, बल्कि कई अन्य लोगों को भी नामजद किया गया है। मीरगंज थाने में दर्ज कांड संख्या 247/26 में सेमराव गांव निवासी गुड्डू राय उर्फ अमरेश राय, उत्सव राय, प्रियांशु कुमार, टिशु राय, सौरव कुमार राय उर्फ टिकोरी राय, विशाल राय और मांझा के सुनील यादव समेत कई अज्ञात हथियारबंद लोगों को आरोपी बनाया गया है।

पुलिस का आरोप है कि कार्यक्रम के दौरान अश्लील नृत्य कराया गया और उसका वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से प्रसारित किया गया, जो कानून के उल्लंघन की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

इधर, वायरल वीडियो को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। विपक्षी दल इस मामले को लेकर सरकार और जदयू विधायक पर सवाल उठा रहे हैं। वहीं समर्थकों का कहना है कि यह पूरा मामला राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है और विधायक की छवि खराब करने के लिए वीडियो को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है।

फिलहाल अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अग्रिम जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब सबकी नजरें कोर्ट के आदेश और एफएसएल रिपोर्ट पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में कई नए खुलासे हो सकते हैं।

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